बनता - तुम नरक के रस्ते पर जा रहे हो
संता - " ओये रोको रोको बस रोको " मै गलत बस मै सवार हो गया हु,
वो तुम्हे दूर से देख कर ही दुपट्टा संभाल लेती है..
क्या बात है...
हैरान हु इस बात से की वो तुम्हारी नियत कैसे पहचान लेती हैं.
आँखों मै आंसू आ जाते है
फिर भी लबो पे हसी रखनी पड़ती है..
ये हाल तभी होता हे
जब लम्बे सफ़र मे
"पोट्टी" रोकनी पड़ती है.
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